Tuesday, March 2, 2010

उड़न तश्तरी की सेकुलर उड़ान ......!

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शाशिभूषणतामड़े उवाच;



दोस्तों,
पीछे अनेक महीनो से मै ब्लॉग लिख रहा हूँ , कोइ तिन चौथाई वक्त तो मुझे ये समझने में ही जाया हो गया की ये यदि अक्लमंदी है तो कमअक्ली क्या है और यदि दोनों के बिच मुनासिब फर्क है तो वो इतना बारीक क्यों है कि इस फर्क को समझने बैठो तो खोपड़ी में बम क्यों फूटने लगते है / खैर , जो भी कुछ हो, ये तो कायम उसूल है कि इन्सान जो कुछ भी सीखता है वो देख और सुनकर ही तुजुर्बा इकठ्ठा करता है और तभी कामयाबी कदम चूमती है / तक़रीबन कोइ एक वर्ष के ब्लोगिंग सफ़र में जो कुछ राय मुझे कायम हुई है वो बदमजा ज्यादा है बनिस्बत खुश्गंवारी के / इस दरम्या ढेरो ब्लोगरो को मैंने पढ़ा समझा / जिनमे कुछ तो इतना बेहूदा लिखते है कि कोफ़्त के मारे अपने सर के बाल नोचने लग जाये,उन्हें पढ़कर ऐसा उबाल पैदा हो जाता है / जब कि कुछ ऐसे किस्म के है कि जिनके हर आयन्दा पोस्ट की इन्तजारी बेसब्री से करते है / उनकी चर्चा मै आगे पूरी तसल्ली से करूंगा परन्तु पहले कुछ चंद बाते हिंदी ब्लोगिंग के बाबत करनी चाहूंगा /
 हिंदी ब्लोगिंग का दायरा कोइ बहुत बड़ा नहीं एक अंदाजे के मुताबिक़ ये कोइ दस या ग्यारह हजार ब्लोगरो का जमौडा होगा जबकि बिलायती ब्लॉगडियो का ब्योरा दसियों गुना बड़ा बताया जाता है / तसल्ली बक्श जो बात है वो ये है कि मौजूदा वक्त हमारे हिंदी ब्लोगिंग का शैशव काल बताया जाता है लिहाजा हम उम्मीद पाल सकते है कि आगे आने वाले वक्त में हिंदी ब्लोगिंग को जवानी फूटकर निकलेगी और इसके हुसन को देख कर हम सर्द आहे भरते रह जायेंगे / आमीन !

जाहिर सी बात है कि जब हिंदी ब्लोगिंग अभी इन-मीन चार दिन का ही बच्चा है तो क्या पिद्दी और क्या पिद्दी का शोरबा जांचने बैठे / पर फिर भी पुतके पग पालने में नजर आते है ऐसा सोचकर विचार करे तो हालात बड़े दुश्वारी भरे नजर आते है / क्यों की आँखे खुल्ली रख कर ब्लोगरो की मानसिकता गौर फरमाए तो कुछ एक बाते बड़ी शिद्दत से उजागर होती है / मसलन किसी भी ब्लोगर के चार प्रमुख असलेह है , पहला है -लेखन की ताकत , दूसरा है -टिपण्णी , तीसरा है -फलोवरशिप और चौथा और आखिरी हथ्थियार है -ब्लोगिंग की उपयोगिता / उपरोक्त चारो असलोह में दो तो ब्लोगर के अस्त्र-शस्त्र है और बांकी दो बाते खुद की और पाठक की आपसी सूझ-बूझ या खसूसियत का मामला है जैसे मेरे ब्लॉग की बुनियादी समझ किसी को अच्छी तो दूसरे को समझ से परे लग सकती है /  

जैसा कि पहले ही अर्ज कर चुका हूँ की हिंदी ब्लोगिंग अभी अपने बचपने जैसी नातजुर्बेकार उम्र से दो चार है लिहाजा ब्लोगरो से सुलझे हुए व्यवहार की उम्मीद फजीहत की बात ही है , परन्तु चाहे जो हो कुछ बाते जो आनुवंशिक दोष के किस्म की है और जो मिटटी है जिससे भारतीय ब्लोगर निर्मित है वो कभी तब्दील नहीं हो सकती, ब्लोगिंग करते हुए एक हिन्दुस्तानी ब्लोगर चाहे-अनचाहे अपने अवगुणों को छुपा नहीं पाता, जिस दरियादिली की उम्मीद उससे ब्लोगिंग करते वक्त दरकार है वो उससे कोसो दूर रोती बिलखती दिखाती है जब कि हिंदी ब्लोगर अपनी दरिद्रता पूर्ण ब्लोगिंग शैली में इस कदर मशगुल हुए रहता है कि उसे अपनी खामखा की गफलत का ख्याल तक नहीं होता / और ना ही ये जान पाता है कि वो अपने लाल बुझकड़ शैली की बाजुहात विश्व स्तरीय ब्लोगिंग से किस कदर पीछे है / विश्वस्तरीय ब्लोगिंग एक हिन्दुस्तानी ब्लोगर के लिए तो अभी दूर की कौड़ी है ही बल्कि ज्यादा बेहतर तरीके से यूं कहे कि अभी तो मुल्क स्तर की ब्लोगिंग में भी हिंदी ब्लोगर कोइ मुकाम नहीं रखता क्यों कि अभी तो वो उन असलोह का भी जायज इस्तेमाल करने नहीं सका है जो उसे मंदिर के प्रसाद की तरह खूब जोरशोर से चलकर या जा जा कर बांटना चाहिए वो ही प्रसाद वो राशन की दूकान की मानिद मर जाने की स्थिति आ जाने तक नहीं बांटता / आगे मै अपनी बात तफ्शील से समझाने के लिए एक निहायत ही उम्दा किस्म के हिंदी ब्लोगर की नजीर पेश करता हूँ जो हिंदी ब्लोगरो के बिच बड़ी आला फराक दिल हस्ती गिने माने जाते है / मेरी निगाह में ये नाम चीन ब्लोगर सच्चा सेकुलर ब्लोगर है / मुमकिन है इस खुलासेको आप सभी ने महसूसा हो मगर शब्दों में पढ़ और समझ पहली दफा ही रहे होंगे ये मेरा यकीं है / ये ब्लोगर कोइ और नहीं बल्कि समीर लाल उर्फ़ उड़न तस्तरी ही है जो सच्चे मायनों में एक सेकुलर ब्लोगर कैसे है ये खुलासा मै अगली किस्त में करूंगा /
थैंक्स !