Saturday, February 13, 2010

गए थे हरी भजन को ओटन लगे कपास !

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शाशिभूषणतामड़े उवाच;



दोस्तों,
गए थे हरी भजन को ओटन लगे कपास !
यह मशहूर कहावत मेरे साथ बिलकूल तब फिट बैठ गयी जब मैंने शिव सेना पर ज्योतिषीय लेख लिखने की सोची और उस बाबत जब असलाह इकठ्ठा करने निकला तो मुझे इल्म हुआ की मेरे पास इतनि  जानकारी हो गयी है की मै उसे एक राजनैतिक लेख के तौर पर कुछ अनुभव बयान कर सकता हूँ लिहाजा नतीजा आपके सामने है /
जून 1966 में  बाला साहेब ठाकरे ने शिव की सेना की बुनियाद खड़ी की थी /
समझने समझाने के लिए ये हैरत अंगेज बात है कि साठ की सदी में ''मार्मिक'' नाम की एक साप्ताहिक पत्रिका में एक अदना सा कार्टूनिस्ट अपने फ़न से वो क़यामत नहीं ढहा पाया जब की एक गैर-राजनितिक संगठन में एसी धार पैदा कर दी कि दुनिया तमाम में पुख्ता लोकशाही की ज़िंदा मिशाल हिन्दुस्तान हांफने लगा / ये तो एक जाहिर सी बात है कि कुनैन निगलेगे तो कै और दस्त तो होगे ही, लिहाजा हिन्दुस्तान के पेट में तब से अब तलक मरोड़ उठ रहे है और हिदुस्तान की तबियत नासाज ही चल रही है /
आजादी के बाद अपनी धंदे पानी की खासी अच्छी समझ रखे के लिए कमोबेश कुख्यात या मशहूर गुजराती और मारवाड़ी कौम सबसे पहले मुम्बई पंहुची, और दोनों ने बिंदास रहकर हर किस्म के धंदे पानी में अपनी पुरजोर दखल बनायीं, पीछे पीछे दक्षिण भारतीय भी आ पहुंचे जिनके हालत कमोबेश आज के उत्तर भारतीयों जैसे ही थे /
''भूमिपुत्र'' का नारा लगाती उठी शिव सेना तूफ़ान बनकर दक्षिण भारतीयों पर टूट पड़ी और उनका दम तोड़कर ही मानी, दूसरी ओर चतुर सुजान कांग्रेस ने इस उधमबाजी को खातिर जमा रखते हुए ''लोहा लोहे को काट खाता है '' जैसे आजमाए हुए नुस्खे को कोम्युनिस्ट मजदूर ताकत के खिलाफ इस्तेमाल में लिया जो बिलाशक फायदा बक्श फार्मूला साबित हुआ / तब के दादर संसदीय क्षेत्र के सांसद कृष्ण देसाई की हाहाकारी ह्त्या हो गयी और कोम्युनिस्ट की थाती इतिहास की भूली बीती बात बन गयी /
कोम्युनिस्टो के सफाए के बाद, कांग्रेस सत्ता के भोग में निमग्न हो गयी जब की शिव सेना के लिए मुद्दा बिहीन बंजर भई कर्म भूमि छोड़ दी जो किसी  बीहड़ में  भटकन जैसा दारुन कष्ट ही दे सकता था /
फिर बिल्ली के भाग से छिक्का टूटा और भगवत कृपा हुई , गुरू जी ने गुरू मन्त्र कान में फूँका याने भाजपा ने दर्शन बखान किया और दारुन त्रासदी का अंत हुआ / दोनों की जुगल बंदी उन्हें प्राप्त अंतर ज्ञान से परम आनंद देने वाली साबित हुई / कट्टर वाद और दोनों के  चोली दामन के रिश्ते ने खूब गुल खिलाया और कांग्रेस को धुल चटा दी / कंगाल हुई कांग्रेस 1995 में सत्ता से बेदखल हो गयी जब की शिव सेना काबिज हुई /
देखा जाये तो आजाद हिन्दुस्तान में कट्टरवाद का ये स्वर्ण काल 1999 में ही खत्म हो गया / जादू का जादू ख़त्म हो चुका / अब बीजेपी और शिव सेना उसी जादू की तलाश में तड़प रही है / कांग्रेस की लोहा काटो निति राज ठाकरे के साथ है और कभी साथ रहे बाला साहेब के खिलाफ है लिहाजा चतुर सुजान तो कांग्रेस है जिसका सुदर्शन चक्र चंहू ओर वार करता है / जय हो कांग्रेस माता की !