Friday, December 17, 2010

ख्समानू खानू खबरिया चैनलों की मौत की दुहाई मांगता एक लेख !

शाशिभूषणतामड़े उवाच;











दोस्तों 
 लोकतंत्र में मिडिया को तीसरे खम्बे के तौर पे अहमियत दी जाती है , यदि कार्यपालिका और न्याय पालिका दोनों अपने दायित्व से च्चुयुत हो रहे हो तो निरीह जनता को मीडिया का ही सहारा रहता है / मगर इतने बड़े दायित्व को धारण करने वाले मीडिया का क्या हाल हुआ पड़ा है कोइ छुपी बात नहीं है / आज मीडिया के नाम पे दो साधन आम जन को मुहैय्या है जो न्यू ज  पेपर और टीवी की शक्ल में है /
आज आप जीस किसी न्यूज चैनल को खोल कर बैठ जाये/ कुछ समय में ही आप यह अहसास पक्का करके उठ खड़े होंगे कि न्यूज के अलावे वो सब कुछ खबरिया चैनलों पे पुरजोर दिखाया जा रहा  है जो बकवास और बेहूदा है , वो चाहे कोइ भी चैनल हो आजतक , स्टार न्यू ज , इंडिया न्यूज , या कोइ और सभी बोगस और बेहूदा कार्यक्रमों से भरे पड़े होते है / एक सुबह सभी चैनलों पर बाबा लोग उबकाई ला देने वाले सर खाऊ भाषण से शुरू हो जाते है / बाद मे ,बाबा लोग जाते नहीं कि ज्योतिषी बाबा राशि फल सुनाने के नाम पर डरावने अंदाज अपना धंदा चमकाने आ पहुँचते है / एक से बढ़कर एक थ्री पिस सूट पहनने  वाले ज्योतिषी बाबा लोग फरांटे दार अंग्रेजी में लोग बाग़ को ग्रंहो के नाम पर उलू बनाते नहीं थकते / स्टार न्यू ज वालो ने तो हद्द ही कर दी / ''तिन देवियों'' को अर्ध नग्न अवस्थ में ही ज्योतिष का पाठ पढ़ाती  सुकुमार कन्याओं को परोस दिया ताकि जिस किसी को ज्योतिष ना सुहाए वो ज्योतिशिनी से ही संतुष्ट हो ले / ईन ज्योतिषियों को खुद के अगले पल का पता हो ता नहीं और लोंगो को अपनी अक्ल से बड़ी बातो में उलझाते दीखते है / एक ही राशी के चौबीस चौबीस फलादेश अलग अलग चैनलों पर सुन सकते है जो कि साबित करता है कि ये सब बेहूदा मजाक के अलावे न्यूज चैनलों की अक्ल दिवालियापण ही है जो उन्हें अपने उतरदायित्व से दूर ले जाकर ज्योतिषियों की शरण में नतमस्तक करता है /
ज्योतिषियों की बकवास पूरी नहीं पड़ती तो अक्ल खराब करने के लिए क्रिकेट महापुराण के नाम पर बखिया उधेड़ काण्ड शुरू हो जाता है / कभी सचिन का  उच्च स्वर से स्तुति गान किया जाता है तो कभी उसे  बुढ़ा शेर बताकर नकारते है कि अब उसे संन्यास ले लेना चाहिए / कभी धोनी  की टांग पकड़कर खींचा जाता है तो कभी किसी एक्सपर्ट से टीम इंडिया की डूबती नाव कैसे पार लगे इसके लिए रहस्यमय मंत्र पुछा जाता है  / याने टोटल हांसिल जमा यह कि दर्शक सोचता रहे कि टीम इंडिया ही इकलौती वो समस्या है जो भारत को उसकी तमाम दुश्वारियो से निजात दिला सकती है /
फिर शुरू होता है समय टीवी सीरियलों की समीक्षा का / किसकी सास कितनी कडक-सा है , किस सीरियल में बहू भारतीय परंपरा गत बहू के नाम पर कलंक है , किसने अपनी पत्नी के पीठ पीछे दूसरी औरत से चक्कर चला रखा है , किसकी बीबी कितनी नीच बुद्धि की है ये सब बयान करने वाले प्रोग्राम पूरी दरिया दिली से दर्शको को परोसा जाता है /
उफ़ , ये क्या ! मैंने उन करतबों को बयान किया ही नहीं जो फ़िल्मी यशो गान है / कौन सी हिरोईन अपने कपडे उघाडू कारनामो को अंजाम दे रही है , कोण सा हीरो किस हिरोईन को उड़ा लेजाने की जुगत में कितना कुशल है ये बखानने वाले प्रोग्राम भी न्यूज चैनलों के अजेंडे पर प्रमुखता से होते है /
बांकी बचे समय में भूतिया, तंत्र मन्त्र , अपराध , खून खराबे की महा गाथा गाने के लिए निहायत ही खौफ्जद्दा तरीके से पेश करने के लिए एंकर आ धमकते है / इनका भयानक अंदाजे बंया अन्दर तक हिला देने वाला होता है , इन प्रोग्रामो में नारा होता है , सोते होतो जाग जाओ , आ गया है सनसनी , और ना जाने क्या क्या बकवास करते है ये बेहूदा न्यूज चैनल वाले / 
कैसे टिकी रहेगी लोकतंत्र की ये खंडहर होती जा रही इमारत इस ढते तीसरे खम्बे पर / खुदा के हवाले ही है ये मुल्क /     

6 comments:

सतीश चन्द्र सत्यार्थी said...

कुछ समय पहले तक लोगों के मन में विश्वास था कि देश में और कोई ईमानदार हो न हो मीडिया जरूर देश हित में काम करती है. पर वह विश्वास उठ स गया है अब. सब टीआरपी की होड में लगे हैं. चाहे उसके लिए कचरा ही क्यों न परोसना पड़े दर्शकों को. आपकी बातों से शत प्रतिशत सहमत..
ब्लॉगिंग: ये रोग बड़ा है जालिम

Jose Ramon Santana Vazquez said...

...traigo
sangre
de
la
tarde
herida
en
la
mano
y
una
vela
de
mi
corazón
para
invitarte
y
darte
este
alma
que
viene
para
compartir
contigo
tu
bello
blog
con
un
ramillete
de
oro
y
claveles
dentro...


desde mis
HORAS ROTAS
Y AULA DE PAZ


COMPARTIENDO ILUSION


CON saludos de la luna al
reflejarse en el mar de la
poesía...


AFECTUOSAMENTE : OS DESEO UNAS FIESTAS ENTRAÑABLES 2010- Y FELIZ AÑO 2011 CON TODO MI CORAZON….


ESPERO SEAN DE VUESTRO AGRADO EL POST POETIZADO DE ACEBO CUMBRES BORRASCOSAS, ENEMIGO A LAS PUERTAS, CACHORRO, FANTASMA DE LA OPERA, BLADE RUUNER Y CHOCOLATE.

José
Ramón...

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