Wednesday, October 6, 2010

एक अदद ईमानदार की तलाश में !

शाशिभूषणतामड़े उवाच;













 प्रिय दोस्तों ,
अक्सर मिलने वालो से शिकायती लहजे में कहते हुए सुनता हूँ कि क्या बतावे सर ज़माना अब वो नहीं रहा कि भले लोगो का गुजारा हो सके , जिधर देखो बेईमान लोगो का जमौडा लगा पडा है जिन में झूठ फरेब , बेईमानी, धोखा और नमक हरामी कूट कूट कर भरी पड़ी है / मेरे एक दोस्त ने फिलोस्फराना अंदाज में अपनी जिंदगी का तजुर्बा बयान करते हुए फरमाया कि मेरे दोस्त  इन्शान धोखा हमेशा अपने खासुलखास से ही खाता है क्योकि परायो को क्या पत्ता कि किस मर्म पर घात किया जाए  ताकी बन्दे को ऐसा घाव लगे कि सारी जिंदगी सलाता रहे / अपनी बात को पुख्ता करने के लिए उन्होंने एक शेर भी सुनाया जो भतेरी बार पहले से ही मेरा सूना हुआ था और शायद आपका भी सूना हुआ हो कि '' हमें तो  अपनों ने लूटा गैरों में कंहा दम था , मेरी किस्ती वंहा डूबी जँहा पानी कम था '' / 
मेरा ख्याल है सरसरी तौर पर हममे से अधिकतर हमख्याल ही होंगे क्योकि ज्यातर लोगबाग अपनी अपनी जिंदगी में थोड़ा कम या थोड़ा बेसी इस किस्म की मुसीबतों से दो चार तो होते ही है कि वो भी मान बैठते है कि दुनिया तो बस बेईमानो की ही है /
मगर मै इस फिल्सफे से इतेफाक नहीं रखता जिसका ये मतलब भी कतई नहीं कि मैंने अपनी जिंदगी में मिठ्ठा-मिठ्ठा ही चखा है , नहीं बल्कि मै कंहू गा कि शायद मैंने जिंदगी में उतने कडवे वाकियो से दो चार हुआ हूँ जितना कोइ सोच भी नहीं सकता और फिर भी ये ही सोचता हूँ कि लाखो करोडो बुराईयाँ रोज घटित हो रही है देश दुनिया और समाज में फिर भी  सूरज चाँद अपनी नियति  नहीं बदलते , पवन ने बहना बंद नहीं किया , पानी फिर भी प्यास ही बुझाता है और ना जाने क्या क्या वैसे ही चल रहा है कुछ भी नहीं बदला / 
मेरा मानना है दो किस्म के प्रभाव की गिरफ्त में दुनिया चलती रहती है , एक वो प्रभाव है जो उपरी तौर पर दुनियादारी में दीखता है और हमें गफलत पैदा होती है कि सब कुछ इन्शान के चलाए चल रहा है जब कि दूसरी वो धारा होती है जो दुनियाबी सिलसिले को बांधे रखती है , ये वो बंधन है जो साश्वत नियमो के तौर पर होते है मसलन बेटा बाप से ही पैदा होता है , गुरूत्वाकर्षण , प्यार -मुहब्बत , सत्य अंतिम विजेता होता है , हर मौसम का अपना अपना मिजाज होता , वैगेरह वैगेरह ये वो नियम है जिसकी धुरी पर दुनिया आगे भी चलती ही रहे गी ये नहीं बदलेंगे / 
अंतिम जित सचाई और ईमानदारी की ही होती है / आज आप अपने आस पास गौर से देखे तो हर इन्शान एक अदद ईमानदार की तलाश में लगा है , एक बाप एक ईमानदार बेटे की चाहत पाल रहा होता है तो एक बेटा भी ईमानदार बाप चाहता है , एक भाई एक सच्चा भाई चाहता है , एक दोस्त भी दूसरा सच्चा दोस्त चाहता है , एक माँ सच्चा बेटा तलाश रही है तो एक पति सच्ची पत्नी चाहता है , एक बनिया एक अदद सच्चे ग्राहक की खोज में जिंदगी जाया किये देता है , भगवान भी सच्चे भक्त की तलाश में ही होते है , बिद्या भी सच्चे विद्यार्थी को मिलती है , देश की जनता सच्चे नेता की तलाश में है याने जिधर देखो सच्च और ईमानदारी की खोज चरम पर है , कोइ नहीं चाहता कि कोइ बे-ईमान उनकी जिंदगी में आये फिर भला क्यों कर हम दूसरो के लिए बे ईमान बने रहते है और क्यों कर दुनिया लूटेरो बे ईमानो की है /