Thursday, March 25, 2010

लाडली नगर बधू के नखरे हजार उठाये कौन १

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शाशिभूषणतामड़े उवाच;

दोस्तों,
वो चाहे अच्छाई हो या फिर बुराई !
पर यदि वो, चाहे या अनचाहे ,हमारे शख्शियत से जुड़ गयी है तो एक वक्त ऐसा भी आता है जब वो अच्छाई या बुराई हमारे जी का जंजाल भी साबित हो जाती है क्यों कि लोगबाग उसी के आदि बन चुके होते है और जब उस की कमी खलती है तो बैचैनी पैदा होती है / मसलन दिल्ली मैट्रो ट्रेन को ही लेले / राजधानी वालो को ही क्यों समूचे हिन्दोस्तान के लिए ये आन बान और शान का मामला है दिल्ली मैट्रो , मुल्क का हर बाशिंदा इस सहूलियत पर इतरा सकता है / मैट्रो का सफ़र हर सवार मुसाफिर को इतराने का मौक़ा देता है जो वो ये महसूस सके कि बिलायती मुल्को के मुकाबले में हम हिन्दोस्तानी भी कम नहीं /
पीछे मेरे एक दोस्त ने बातो-बातो में मैट्रो के बाबत जो ख्याल बयान किये वो मेरे दिल को छू गए , यदि मै कोइ कवी या शायर होता तो उस बयान को भली तरह से बोलो में गूँथ कर आपके आगे परोसता , पर जो हो , मै वो तमाम बाते ज्यू की त्यु आपके आगे रखता हूँ -
मैट्रो तू मेरी राहते उसांस है /
मैट्रो तू मेरे फ़ौरन घर वापसी की इकलौती आस है /
मैट्रो तू मेरे बटुए की दांतदार चैन है / जो सदा मजबूती से बंद होती है /
मैट्रो तू दम तोड़ते पर्यावरण की संजीवनी बूटी है /
मैट्रो तू घर के बिगड़ते बजट में वो जोकर है जो हर पत्ते के साथ फिट है /
मैट्रो तू दिल्ली की इकलौती लाडली नगर बधू है, जो हर मुसाफिर चहेते को फ़ौरन गोद में लेकर ठंडा-ठंडा कूल कूल कर देती जैसे बीबी उसकी अपनी हो /
और ना जाने क्या क्या मेरे उस मित्र ने बयान किया पर जो लाबोलुआब था वो ये ही था कि मैट्रो में सवार मुसाफिर सफ़र खत्म होने तक तो यक़ीनन इसी ख्याल में ग़ुम हो जाता है कि वो किसी पराये बिलायती मुल्क में आ पंहुचा है / इसकी साफ़ सफाई ,चुस्ती और चाक-चौबंदगी  आला दर्जे की है  और इसकी इन्ही खसूसियत की वजह से मैट्रो दिल्ली वालो की लाडली बहू बनी है / जब मैट्रो नहीं थी तो ब्लू लाईन,वाईट लाईन और ना जाने किन किन कर्मजली लाईनों ने दिल्ली वालो को आठ-आठ आंसू रुलाया था जिसे याद करके रूह फन्ना जाती है / खैर , बिल्ली के भाग से छिक्का टूटा , मैट्रो आई और इस लाडली बहू ने खूब दिल्ली बालो का दिल जित लिया मगर ना जाने क्यों इधर जब तब इसका खुशगंवार मिजाज एकदम से बिगड़ जाता है और जब जन्हा जैसे भी रूठकर खड़ी होजाती है /
और बहाना होता है '' यात्रा में रूकावट का हमें खेद है !
एक विश्व स्तरीय व्यवस्था बनने के लिए भरोसे की अग्नि परीक्षा में मैट्रो को नाकामयाब होने की इजाजत कोइ भी नहीं देगा अलबता सौ फीसदी कामयाबी ना सही पर फिर भी त्रुटी हिन् तो बनना ही चाहिए और ये प्रयास पूरी नेकनीयती से हो यही हम चाहते है /
और अंत में कहूंगा -
गमखार है हम , गमो ने हमें संवारा है !
तुम नाहक थक जाओगे ,टूट जाओ गे , बिखर जाओगे !
ये शीशे का महल तुम्हारा है !
पत्थर है हम नाजाने कभी से /
ना टक्कराओ , अभी दामन तुम्हारा कुंवारा है !


 

5 comments:

Anonymous said...

सर जी
अच्छी बकवास लिखी है आपने / बधाई हो !
लगे रहो !

S B Tamare said...

जनाब !
बकवास ही सही मगर आपने अपने कीमती वक्त को जाया करके मेरी बकवास को पढ़ा इसके लिए शुक्रिया /

khuljaasimsim said...

वाह भाई जी !
कल तो आप इसी विषय पर चर्चा कर रहे थे और आज लिख कर टांग भी दिया /
अच्छा लेख , इसमे कोइ शक नहीं कि मेट्रो दिल्ली और देश की शान है /
अच्छे लेख के लिए धन्यवाद !

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

एक विश्व स्तरीय व्यवस्था बनने के लिए भरोसे की अग्नि परीक्षा में मैट्रो को नाकामयाब होने की इजाजत कोइ भी नहीं देगा अलबता सौ फीसदी कामयाबी ना सही पर फिर भी त्रुटीहीन तो बनना ही चाहिए और ये प्रयास पूरी नेकनीयती से हो यही हम चाहते है।

वाह महाराज्! आप भी कहाँ हिन्दुस्तान की नौकरशाही से नेकनीयती का मुगालता पाल बैठे। हमारी तो पढते ही हँसी छूट गई :-)




क्या कोई रत्न(gem stone) आपके जीवन की दिशा बदल सकता है?

Babli said...

आपकी टिपण्णी के लिए बहुत बहुत शुक्रिया!
बहुत बढ़िया लिखा है आपने जो काबिले तारीफ़ है! उम्दा प्रस्तुती ! बधाई!