Saturday, February 27, 2010

बड़े दिल वाले मुल्क के तंग-दिल हाकिम !

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शाशिभूषणतामड़े उवाच;







दोस्तों,
'' मै ''अमुक '' ईश्वर को हाजिर जानकार सौगंध खाता हूँ की एक मंत्री के तौर पर जो भी विषय मेरी जानकारी आवेगा या लाया जाएगा उसे मै भयमुक्त  और निष्पक्ष रह कर संज्ञान में लूंगा ''

इसी किस्म के वो चंद मिलते -जुलते अल्फाज और होते है जब हमारे नुमायिंदे बतौर मंत्री के ''ओथ'' ले रहे होते है / मगर उठायी गयी कसम कितने फीसदी अमल में लाते है हमारे ये हुक्मरान , नो डाउट , भयमुक्त तो ये होते है मगर तरफदारी ये पुरे दीदादिलेरी के साथ और पूरी बेहयाई से दस्तूर मानकर करते है / मसलन पिछली सरकार में लालू प्रसाद यादव को ही लेले / जब वो रेलवे में कर्ताधर्ता थे तो पूरा महकमा बिहार की तीमारदारी में जुटा रहता था , एक से बढ़कर एक रेलवे की दुनिया तमाम किस्म की योजनाये बिहार को समर्पित थी , हर बड़ी छोटी योजनाये बिहार को ही निगाह में रख कर तैयार की जाती थी और अब आज ममता दीदी रेलवे पर काबिज है तो उसने जो रेलवे का लेखा-जोखा दुनिया को नुमाया किया है वो किस किस्म की चुगली करता है वो कोइ छुपा नहीं / जिस फराकदिली से दीदी ने रेलवे की ताकत बंगाल पर लुटाई है वो लालू प्रसाद की तरफदारी को भी धत्ता बताती है , लालू भी अफ़सोस मानने लगे होंगे कि काश मैंने भी ममता के माफिक पूरी बे-हयाई से ''ताकत'' का फ़ायदा उठाया होता तो वापिस महकमे पर काबिज हुआ होता /
इस किस्म की मानसिकता हमारे नुमायिन्दो में दिनानुदिन बिफरती जा रही है जिसका एक सीधा-सा मायने ये निकलता है की जो महकमा जिस किसी के हत्थे चढ़े गा वो महज उसी इलाके या सूबे को काबिले-मेहरबानी माना जाए गा जन्हा से कि वो नुमायिन्दा है बांकी का हिन्दुस्तान तमाम टापता रहे गा / एक को छोड़कर बांकी के सारे उपवास पारण करेंगे जब तक कि उसी महकमे में उनका रिश्तेदार नहीं काबिज हो जाता /  इस मानसिकता को श्याह से सफ़ेद साबित करने के लिए जो दलील पेश किजाती  वो भी कम हाहाकारी नहीं कि वो सूबा बाँकियो के मुकाबले कमजोर है लिहाजा उस पे मेहरबानी मुनासिब है / इस '' तरफदारी '' के कई फायदे है तो नुकसान भी हजार है / ये ठीक है कि एक खासमखास इलाके में उस महकमे की मेहरबानियो के एवज में तरक्की की हल्कि-सी बयार बह निकलती है मगर ये भी तो देखे की तरक्की किसी एक इकलौते महकमे के ताबे में नहीं होती जो उसके बुलाये नंगे पांव दौड़ी चली आये , तरक्की तो खुशहाली की तजबीज है जो सभी के एकजुट बुलावे पर ही आना कबूलती है /
वो आला हस्ती इंदिरा गांधी ही थी जिसने हमारे आज के हुक्मरानों के लिए तरफदारी की राहे-नजीर पेश की थी / इंदिरा जी ने रायबरेली को गोद में लिया , राजिव गांधी ने अमेठी को तरक्की के पालने में झूले झुलाए और ना जाने किस किस ने इस कामयाब नुस्खे को जमकर आजमाया / इस फेहरिस्त को जांचने बैठे तो शैतान भी हांफने लग जाए गा / मगर एक जो खासुलखास खुलासा इस मानसिकता के पीछे छुपा खूब दिखता है वो है मुल्क के लोगो की तरक्की की चाहत जो वो अपने नुमायिन्दो से पुरजोर रखते है और जो हुक्मरान अपनी शर्तो पर शातिर व्यापारी वाले अंदाज में किस्तों में अदा करते है और तो और वो भी किसी ख़ास सूबे या इलाके तक ही /
तो क्या किसी ख़ास इलाके को छोड़कर किसी ''अपने वाले सूबे या इलाके '' की  तरक्की के पीछे ना-काफी संसाधनों रोना है , ये बहाना मेरे हलक से निचे तो नहीं उतरता क्यों की ये तरिका एक अनार और सौ बीमार वाली कसर पूरी करेगा और सीधे-सीधे असंतुलित समाज की तस्बीर उकेरेगा / जैसे पेट तो गुबारे की तरह फूला हो मगर टाँगे कमजोर / साफ़ है की जिस्म का वजन ढ़ोने वाली टाँगे भी मजबूत होनी चाहिए /
मुल्क का हाकिम ही जब इन्साफ-पसंद नहीं होगा तो रब्ब जाने अंजामे गुलिस्तान क्या होगा / फिर तो मुल्क के तमाम वाशिंदे दिल्ली और मुंबई जैसे शहरों का रूख करे तो क्या बुरा है !




होली की सभी ईष्ट मित्रो को मेरी तरफ से बहोत-बहोत मुबारकबाद !                               

1 comment:

Babli said...

आपको और आपके परिवार को होली की हार्दिक बधाईयाँ एवं शुभकामनायें !