Thursday, December 24, 2009

भाषा धीरे धीरे भ्रष्ट हो रही है,!


दोस्तों,
साहित्य अकादमी के वर्ष 2009 के पुरस्कारों की घोषणा कर दी गयी है / हिंदी के प्रसिद्ध विद्वान कवी , चिन्तक और विचारक डाक्टर श्री कैलाश वाजपेयी को उनकी कविता संग्रह ''हवा में हस्ताक्षर '' के लिए सम्मानित किये जाने का फैसला हुआ है / बुद्धवार 23 दिसंबर को साहित्य अकादमी के सचिव अग्रहार कृष्णमूर्ति जी ने 24 भारतीय भाषाओ के साहित्यकारों के नामो की घोषणा की जिसमे श्री बाजपेयी भी एक है / इस पुरस्कार वितरण का विशेष आयोजन नयी दिल्ली में 16  फरवरी 2010 को आयोजित किया जाये गा / इस पुरस्कार अर्पण में 50 हजार रूपये की राशि और एक उत्कीर्ण ताम्र फलक प्रदान किया जाएगा /
डाक्टर श्री बाजपेयी का कथन है की '' भाषा धीरे धीरे भ्रष्ट हो रही है, हम एक नए किस्म की अपभ्रंश युग में प्रवेश कर गए है जिसमे एक तरफ अकेली कविता है और दूसरी तरफ मानविकी के अनेक विषयों से उपजी जानकारियों का सैलाब है , फिर भी यह आशा नहीं छोड़नी चाहिए की यह दौर भी गुजर जाये गा और आदमी छपे हुए शब्दों की ओर फिर लौटेगा ''
दोस्तों, यह तो थी वो ख़ुशी की खबर जो मै आपसे सहभागी होना चाहता था , दूसरी बात यह है की श्री बाजपेयी का एक दूसरा रूप भी है जो मूर्धन्य साहित्यकार होने से अलग है / श्री बाजपेयी ज्योतिष शास्त्र में अभिन्न रुचि रखते है यधपि ज्योतिष के ज्ञान का उन्होंने कभी सार्वजानिक प्रदर्शन नहीं किया परन्तु मै जानता हूँ जो मर्म वो इस शास्त्र का समझते है वो अच्छे से अच्छे ज्योतिषियों को नसीब  नहीं /  ज्योतिष ही वो साधन है जो डाक्टर श्री बाजपेयी और मुझे , दोनों को करीब लाने का बहाना बनी और वो भी इतना की जैसे मानस पिता-पुत्र !
यह मेरा सौभाग्य है की डाक्टर श्री बाजपेयी ने मुझे मानस पिता  जैसा स्नेह दिया और सदैव देते रहेंगे यह मेरा विशवास है / आप प्रिय दोस्तों से मेरी अपील है की डाक्टर श्री बाजपेयी को फोन या ई-मेल द्वारा अपनी ख़ुशी जरूर बयान करे /
डाक्टर श्री कैलाश बाजपेयी का संक्षिप्त जीवन परिचय कुछ इस प्रकार है ------
 
शिक्षा -
लखनऊ विश्वविद्यालय से एम.ए., पी-एच.डी.
  सन्‌ १९६० में टाइम्स ऑफ़ इण्डिया प्रकाशन संस्थान द्वारा बम्बई में नियुक्ति।
सन्‌ १९६१ में दिल्ली विश्वविद्यालय के कॉलेजों में प्राध्यापन।
सन्‌ १९६७ में चैकोस्लोवाकिया की यात्रा। सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम के अन्तर्गत १९७० में रूस, फ्रांस, जर्मनी, स्वीडन और अन्य यूरोपीय देशों में काव्यपाठ।
सन्‌ १९७२ में भारतीय सांस्कृतिक केन्द्र ब्रिटिश गायना जार्ज टाउन में केन्द्र-संचालक के रूप में निर्वाचित। ‍सन्‌ १९७३ से १९७६ तक मेक्सिको के एल कालेजियो द मौख़िको में विज़िटिंग प्रोफ़ेसर।
सन्‌ १९७६ के मध्य से १९७७ के शुरू तक अमरीका के डैलस विश्वविद्यालय में एडजंक्ट प्रोफ़ेसर।
सन्‌ १९८३ में क्यूबा सरकार द्वारा हिन्दी कविआ पर व्याख्यान और कविता-पाठ के लिये हवाना में आमन्त्रित।
सन्‌ १९८४ में कोएनोनियन फ़ाउंडेशन के निमन्त्रण पर अमरीका के चार विश्वविद्यालयों में काव्य-पाठ। दिल्ली दूरदर्शन के लिए कबीर, हरिदास स्वामी, सूरदास, जे. कृष्णामूर्ति, रामकृष्ण परमहंस और बुद्ध के जीवन-दर्शन पर फिल्म-निर्माण। भारतीय दूरदर्शन की हिन्दी सलाहकार समिति के सदस्य।
प्रकाशित कृतियाँ : शोधप्रबन्ध – आधुनिक हिन्दी-कविता में शिल्प (१९६३)।
कविता संग्रह : संक्रान्त (१९६४), देहांत से हटकर (१९६८), तीसरा अँधेरा (१९७२), महास्वप्न का मध्यान्तर (१९८०), प्रतिनिधि कविताएँ (१९८८), सूफ़ीनामा (१९९२, सूफ़ीनामा (द्वितीय संस्करण- १९९८), भविष्य घट रहा है (१९९९), हवा में हस्ताक्षर (२००५), शब्द संसार (२००६), अनहट (२००७), मॉस्को में दिल्ली के दिन (कविता संकलन रूसी भाषा में)
भारतीय कविता के संपादित-अनूदित संकलन : इंडियन पोयट्री टुडे ९१९७६), विजन्स एंड मिथ्स (१९७९)।
संपादित कविता-संकलन: मोती सूखे समुद्र का (१९८८)।
दर्शन : द साइंस ऑफ़ मंत्राज़ (१९८१, अंग्रेज़ी और स्पहानी भाषाओं में), एस्ट्रा-कॉम्बिनेशंस (१९८७, अंग्रेज़ी भाषा में)
नाटक : युवा संन्यासी, विवेकानन्द – १९९१
सार : आख्यायिकाएँ (१९९४)
निबंध संग्रह : समाज दर्शन और आदमी (१९९५), आधुनिकता उत्तरोत्तर (१९९६)
एन एंथालिजि ऑफ़ माडर्न हिंदी पोएट्री (१९९६)
प्रबंध काव्य : पृथ्वी का कृष्णपक्ष (१९९५)
रूसी, जर्मन, स्पहानी, डेनिश, स्वीडिश और ग्रीक आदि भाषाओं में कविताएँ अनूदित-प्रकाशित
सम्मान : हिंदी अकादमी (१९९५)
एस.एस. मिलेनियम अवार्ड (२०००)
व्यास सम्मान (२००२)
ह्यूमन केयर ट्रस्ट अवार्ड (२००५)
अक्षरम्‌ का विश्व हिन्दी साहित्य शिखर सम्मान : २००८
फोन -- 011 26565861 ई-मेल - sbtamre@gmail.com
थैंक्स/