Friday, November 27, 2009

क्या आपके खाने में जहर मिला है !

दोस्तों,
इघर कुछ दिनों से खाद्य आपूर्ति आदि का सरकारी अमला थोडा सुस्त सा पडा मालूम पड़ रहा है वरना पीछे दीपावली गयी उसके दरम्यान काफी सक्रीय हुआ हुआ था / बड़े जोर शोर से एसे लोगो की पकड़ धकर चल रही थी जो खाद्य पदार्थो में मिलावट कर ज्यादा धन पैदा करना चाहते हो  / उतर प्रदेश में तो थोक भाव से नकली मावे के साथ पचिसयो व्यापारी पकडे जा रहे थे / हालात इतने बुरे दिख रहे थे की मैंने फैसला किया था की इस दफा दीपावली बिना मिठाई के ही गुजारी जाये केवल बच्चो की ख़ुशी के लिए अपने हांथो से खास तौर पर तैयार मिठाई ही इस्तेमाल में ली जाए / और हम ने अपने इस अघोषित नियम का सख्ती से तामिल भी किया /
इस प्रसंग को बयान कर मै यह कहना चाहता हूँ की आज समाज इस बदतर हालात का शिकार हो चुका की धन की लालसा में वो खाने पिने की चीजो में उन जहरीली चीजो को भी मिलावट के तौर पर इस्तेमाल कराने में गुरेज नहीं करते  जो सस्ती तो होती है मगर एसी खौफनाक बीमारियों को खाने वाले के शरीर में डाल जाती है की बन्दा एड़ीयाँ रगड़ रगड़ कर मर जाता है /
ज्यादा धन की प्यास आदमी को आदमियत छोड़ पिशाच में तब्दील कर रही है , लोग ये क्यों भूल जाते है की उस धन को वे कैसे भोग पायेंगे जो पैशाचिक वृति से कमाई हो /
अंग्रेजो ने हिन्दुस्तान की पूरी की पूरी रवायत ही चौपट कर दी , हिन्दुस्तान को अपने जैसा गोस्त खोर में तब्दील कर दिया, जल्द ही लोग बाग़ हांथो में नोटों की गद्दियाँ लिए भटकते मिल जायेंगे की शुद्ध भोजन , हवा और पानी कहाँ मिलते है /
जिस मिलावटी खाद्य चीजो को खा कर हम बीमार होंगे उस रोग का कोई इलाज भी नहीं मिलेगा क्यों की दवा भी तो नकली मिलाती है / सरकार भी क्या करे गी चार पकड़ो तो आठ दुसरे और ज्यादा उत्साह से आ जुटते है / यानि रोग की जड़ को खंगालने के बजाये परिणामो को दवा दी जा रही है और वो भी आधी अधूरी / शर्त है मेरी एक ना एक दिन सारा भारत मुर्दाखोर बन ही जाये गा / क्या करेंगे जब खाने को शुद्ध खाद्य वस्तु ही नहीं मिलाती होगी कही और  ना ही रोग का इलाज होगा /

सरकार को चाहिए वो वैसे विद्यालय भी खोले जंहा इन्शानियत का पाठ भी हिन्दुस्तानियों को साथ में सिखाया जा सके /थैंक्स /