Wednesday, November 18, 2009

यह रुपिया फटा है मै नहीं लूंगा !

प्रिय दोस्तों ,
चाहे अनचाहे और जाने अनजाने में हम आम प्रायः हम सभी भारतीय अपने देश की संप्रभुता को चोट करते रहते है / ज्यादा तर तो हम यह चोट अनजाने में ही करते है परन्तु बहुतेरे यूं भी है जो पुरे तफ्शील से करते है / अभी दो दिनों पहले हुआ यूं की मै एकदम से दिल्ली मेट्रो की सवारी के लिए विवश हो गया / मैंने कश्मीरी गेट से रोहिणी के लिए टिकट खिड़की से टिकट मांगी और बदले में पचास रूपये का एक नोट दिया / टिकट काटने के लिए जो बन्दा था उसने वो नोट मुझे वापस करते हुए बड़ी हिकारत भरी जुवान में कहा -'' यह नोट नहीं चले गा , दूसरा नोट दीजिये ''
मैंने हैरत से पूछा -'' क्यों क्या गड़बड़ है /  जवाब में उसने कहा नोट पुराना है और फट चुका है / मैंने बुकिंग क्लर्क से मांग करी की वो मुझे लिख कर दे की वो ये नोट नहीं लेगा / उसकी और मेरी बहस लम्बी चलती देख कतार में खड़े लोग बाग़ जल्दी करो का शोर मचाने लगे / परन्तु मै पता नहीं जैसे किसी जूनून की गिरफ्त में था जिद पर अड़ा रहा और एक लंबा चौड़ा भाषण दे डाला जिसका फर्क ये पडा की क्लर्क ने मुझे इंचार्ज से मिलने को कहा मै वहा से निकल कर इंचार्ज के पास जा पहुंचा और जो उसे समझाया वो कुछ एस तरह था -
पुराने समय में जब सोने चांदी के धातु के सिक्के विनिमय के लिए प्रयोग में लिए जाते थे तो समय पाकर वो घिसते जाते थे यानि 100 रुपये मूल्य का सोना सिक्के के तौर पर घिसता घिसता 70 या 80 या उससे भी कम का होता जाता था / इसी बिच कागज़ का आविष्कार हुआ तो सोने चांदी की घिसावट रोकने के लिए '' नोट '' जारी किये गए / अंग्रेजी शब्द नोट का अर्थ रुपिया नहीं होता बल्कि अर्थ होता है ''कोई विशिष्ठ बात '' जो उस कागज़ पर लिखी जाती है जिसे हम रूपये के तौर पर जानते है और यह विशिष्ठ बात हमारे भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर सभी नोट पर लिखते है की -'' मै आपको वचन देता हूँ की मै धारक को ''इतने इतने '' रुपये अदा करूंगा /  गवर्नर के इस ठोस आश्वासन के पीछे रिजर्व बैंक में रखा वो सोना है जितने मूल्य का नोट हमने मेहनत से कमाया होता है / यदि आपके पास पचास रुपये है तो आपके पचास रुपये मूल्य का सोना रिजर्व बैंक में सुरक्षित पडा है लिहाजा वो नोट नोट नहीं सोना है / यही वजह है की रुपयों में सीरियल संख्या डाली जाती क्योकि जो नोट कट फट जाते है उसी संख्या के रिजर्ब बैंक वापिस नए नोट छाप कर बाजार में डाल देता है / यह प्रक्रिया निरंतर चलती रहती है / फिर भला कटे फटे नोट का क्या महत्त्व जब हमारे नाम का सोना रिजर्ब बैंक के पास सुरक्षित पडा है /
इंचार्ज समझदार बन्दा था वो मेरी बात समझ गया / उसने फ़ौरन से पेश्तर मुझे रोहिणी की टिकट मंगवा दी और सहर्ष वो फटा हुआ पचास का नोट कबूल किया / थैंक्स/    

3 comments:

kase kahun?by kavita. said...

aap ke joojharoopan ko salaam.

डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह said...

Dear Tamhare ji,tried my best but your address or email was not available.
Kindly provide it on my email add.
bksrewa@gmail.com
Your article was good and informative aswerll.Thanks for the same.You promised to forecast our future.
my dob is 27.o1.1961 time 8.15eveningat Haldwani UP.
kindly let me know about my future perspectives,,financial prospects and career.
I will be oblige to get yr advice what to do if something is not good and not in favour?
regards ,
dr.bhoopendra singh

सुलभ सतरंगी said...

आप का अंदाजे बया अलग है.
-----
आप को ४०वा नंबर मिला इसके लिए शुक्रिया. वैसे भी आजकल लगन का भीड़ भाद है. ११,३१,५१ का भीड़ है. भीड़ से बचना चाहिए न.