Saturday, October 31, 2009

भविष्य को लेकर मै भयभीत हूँ !


दोस्तों,
जीवन में कई उलझने यूं आजाती है जो पीछे एक लम्बी सोंच के लिए जगह छोड़ जाती है जिसके बाबत बाद में भी ज्यादा कुछ नहीं कर पाते भले ही चाहे जीतनी रोक थाम क्यों ना करले, इसकी मुख्य वजह यह है की समस्या का दूसरा सिरा छोटे मासूम बच्चो के हाँथ में होता है और उनको हम डिक्टेट नहीं कर सकते /
हुआ यूं की मेरे दो बच्चे है , पहला आदिय और दूसरा प्रिथुयश / आदित्य पांचवी श्रेणी में जबकि प्रिथुयश दूसरी में पढ़ते है / आदित्य का स्वभाव ''शांता कारम '' है , विनम्रता और आज्ञाकारिता उसमे कूट कूट कर भरी है / मै उसके गुणों से अत्यंत मुतमुइन हूँ / पीछे दीपावली के बीस पचीस दिन पहले वो दुपहर को स्कूल से गुमसुम सा लौटा जभी मै घर पर ही था मैंने कुछ अनियमित सा महशुस कर उससे कारण पूछा तो उस ने पेट दर्द की शिकायत बता दी , और ज्यादा पूछताछ के नतीजे के तौर पर उसने बताया की सुमित नाम के लड़के ने उसके पेट में किक मारी थी तभी से दर्द बढ़ता जा रहा था /
मैंने वस्तु स्थिति की गंभीरता को समझा और तुंरत उसे डॉक्टर के पास लगाया / डॉक्टर ने अल्ट्रा साउंड करने के साथ ही बांकी सभी जरूरी कदम उठाये और पेट में गहरी चोट साबित करदी / मै ने आईंदा के पांच दिन बड़े ही चिंतातुर अवस्था में गुजारे , प्रभु से निरंतर बिनती और मिन्नतें करता रहा और प्रभु की कृपा रही की दस पंद्रह दिनों में आदित्य स्वस्थ हो गया /
अब बारी पुरे वाकिये को दरयाफ्त करने की थी मैंने लिखित शिकायत स्कूल प्रशासन को दर्ज करायी और लिखित जवाब की ताकीद की , जैसी की उम्मीद थी स्कूल में हड़कंप मच गया / हेड मिस्ट्रेस और सुमित के साथ उसके अभिभावक मेरे घर और ऑफिस में रेलमपेल मचाने लगे / लड़के से माफ़ी मंगवाई गयी अभिभावक के साथ स्कूल प्रशासन भी दंडवत हो गए उन्हें भय सता रहा था की मै मामले को पुलिस तक ना ले जाउ जब की मेरी मनसा वैसी तो कतई नहीं थी परन्तु स्थिति की विकटता जरूर उस बच्चे को समझाना चाहता था क्योकि उस दरम्यान मैंने सुमित के विचारो को हावभाव तथा बातचीत से खूब समझने की कोशिश की वो पूरी जोर से प्रतिक्रिया देने का हामी लगा मुझे जो की टीवी और हिंसक फिल्मो की देंन थी /
आज कल के बच्चे  निःसंदेह अद्भूत प्रतिभा के धनि है परन्तु तीव्रता की अधिकता ,उत्तेजना और हिंसा उनके स्वभाव में इस कदर रच बस गयी है की उनमे सहजता नहीं बची है / यह सब बाते सोच कर मै भविष्य को लेकर  भयभीत हूँ !

Friday, October 23, 2009

कादर खान अभिनय प्रतिभा के कितने धनी है !


दोस्तों,
अब वो पुरे बहत्तर साल का होगया है परन्तु उसके अभिनय में रवानगी अभी भी उतसाह से भरे युवाओं जैसी ही है /
अभी दो दिन पहले मेरे एक मुंबई निवासी अभिनेता मित्र ने मुझे बातो बातो में बताया की आज मशहूर चरित्र अभिनेता कादर  खान का जन्म दिन है / मैंने जिज्ञासा वश उनकी जन्म तिथि और समय जानना चाहा  परन्तु दिन महीने और साल से अधिक कुछ भी मालूम हो सका फलतः मैंने ज्योतिषीय आलेख लिखने के बजाय इस महान कलाकार को बधाई देने के उद्देश्य से उनकी उम्दा फिल्मो की चर्चा करना बेहतर समझा क्यों की कई एक नाम चीन कलाकारों जैसे अमिताभ आदि को तो मीडिया का प्रबल सहयोग मिल जाता है जब की दुसरे कलाकारो  को उनके जन्म दिन पर व्हिश तक नहीं किया जाता /
अब तक तिन सौ से भी ज्यादा फिल्मो में अनेक किस्म के किरदार निभा चुके कादर खान प्रतिभा के ईतने धनी है की अभिनय की मशरूफियत के साथ साथ पट कथा लेखन में भी पक्के उस्ताद है उनके भावः पूर्ण ,धारदार और ओजस्वी डायलोग अनेको फिल्मो  की सफलता का प्रमुख सोपान रहे है और आगे भी प्रभु की कृपा से लम्बे समय तक रहेंगे /
उनके अभिनय की रवानगी तब दिखती है जब वो किसी भी किस्म के किरदार को अपने अभिनय के बलपर जिवंत उतार देते है /
उनके अभिनय का लोहा सभी मानते है / उन्होंने अस्सी से भी ज्यादा फिल्मो में सम्वाद दिए जो अद्वितीय उपलब्धि है/ जो थोडी बहुत फिल्मे मैंने उनकी देखि उनमे इन्कलाब , जुदाई , दुल्हे राजा , और बाप नम्बरी और बेटा दस नम्बरी ज्यादा पसंद आई /
खुदा से मै उनके लिए लम्बी उम्र और ढेर सारी कामयाब फिल्मो की दरखास्त करता हूँ / आमीन !

Wednesday, October 7, 2009

ललित मोदी की क्रिकेटया राजनीती !

दोस्तों,
आज कोई भी हिन्दुस्तानी क्रिकेट के विषय पर आपस में बाते कर के राजी नहीं है क्यों की जो उम्मीदे हम ने टीम इंडिया से लगायी थी वो सारी धुल में मिल गयी / ख़ास कर चैम्पियन ट्रोफी की बदमजा हार के बाद तो कोई भी क्रिकेट सोचना तक नहीं चाहता है परन्तु मेरे दिलो दिमाग में हार के कारणों को खोज निकालने के लिए बेचैन था और मैंने वो प्रमुख वजह खोज निकाली है और वो है ललित मोदी !
ललित मोदी वो वाहिद शख्श है जो भारतीय क्रिकेट को गर्त में मिलाने को कसम खाए बैठा है / सन 1985 में  ड्यूक  युनीवरसिटी अमेरिका में जब ललित मोदी स्नातक की शिछा ले रहा था 400 ग्राम तो कोकीन रखने और किडनेपिंग जैसे गंभीर अपराध में दो वर्ष सजा की हुई परन्तु प्रोबेसन पर हुआ रिहा [देखे वर्ल्डकिपिदिया]
सन में 2007 जयपुर में जो बम विस्फोट हुआ उस दौरान पीडितो को 6 करोड़ का चेक जो दान में दिया वो आजतक कैश नहीं हुआ / मुम्बई हाई कोर्ट में भी ललित मोदी के खिलाफ मुक्क्दमे रहे है 420 और 467 धारा से मुत्तालिक है जो / राजस्थान कई क्रिकेट बोर्ड के खातो में रकम घोटाले का आरोप लग चूका है / दिल्ली में जन्मे ललित मोदी अत्यंत सम्पन्न लोगो की तरह जीवन बसर करते है / एक पुत्र और एक पुत्री के पिता है ललित मोदी / पुत्र रुचिर और पुत्री अलिया अत्यंत हाई फाई स्कूल में मुम्बई में पढ़ते / समस्त परिवार को निकोलस नाम की कंपनी सुरक्षा प्रदान करती है वो भी अलग अलग जिसका भुक्तान आई पि एल यानि बी सी सी आई करती है है / इतनी सारी खूबियों वाले ललित मोदी आई पि एल के अध्यक्ष और बी सी सी आई, चैम्पियन लीग जैसे अनेक क्रिकेट संबध प्रकोष्ठों में उच्च पदाधिकारी है / आई पि एल फोर्मेट इनकी ही दें है जिसने खिलाडियों को खेल से ज्यादा धन की परवाह करना सिखाया है / ललित मोदी की ललित कला ने क्रिकेट का सत्यानाश कुछ इस कदर है की कुछ क्रिकेट पंडित तो वन दे मैच फोर्मेट समाप्त करने की मांग करने लगे है किया / यानि जब सुपर फास्ट 20/20 मौजूद है तो 50/50 का क्या काम / जाहिर है तकनिकी तौर पर क्रिकेट का कत्ल / परन्तु इस चक्कर अत्यधिक में क्रिकेट हो रहा है जो वीरेंदर सहवाग, जाहिर खान, है रूद्र प्रताप सिंह और युवराज सिंह जैसे चोट खाए खिलाडियों की फौज खड़ी कर रहा है जो जब भी देश को जरूरत पड़े उपलब्ध नहीं रहते और नतीजे में देश हार जाता /

खिलाडी पैसा बनाये वो धनि हो हम्मे एतराज नहीं मगर देश हार जाये और वो भी थके थके खेल की वजह से तो हम्मे पूरा एतराज है / ललित मोदी जैसे ललित कलाकारों ने क्रिकेट को तबाह कर दिया है परन्तु जब तक उच्च लेवल पर शरद पवार, अरूण जेतली और राजीव शुक्ल जैसे राजनीती के धुरंधर बैठे है भलाई की उम्मीद करना बेकार है क्यों की ये अपने रसूख का इस्तेमाल करके क्रिकेट की लोकप्रियता का लाभ पाने के लिए मनचाहा प्रयोग करते रहेंगे / अबतो इश्वर ही क्रिकेट को जीवित रख सकता है / थैंक्स /