Wednesday, June 10, 2009

चाल में ठसक हिन्दुस्तानी हो

मुगलों के लंबे शासन के बाद अंग्रेजो के शासन में २०० बरसो तक भारत का दम घुटता रहा और अनगिनत कुर्बानियों का सुफल हमारी आजादी के रूप में सामने है /अंग्रेजो का मिजाज आजादी की जंग की तपिस ज्यादा झेलने के हिसाब से कमजोर साबित हो रहा था किंतु मुद्दा गंभीर यह था की चालीस पैतालीस करोड़ की जनसँख्या वाले देश को नियम कायदों की लछमन रेखा के अंदर कायम रखने की सामर्थ है किस में , वो जो खून का बदला खून चाहते थे किसी दृष्टिकोण से योग्य नही है , ठीक है अन्य पहलू से वे देशभक्त हो सकते है परन्तु अपनाये जाने वाले विरोध की भाषा कतई समाज को नही बंधे रख सकती थी , लिहाजा उपलब्ध विकल्पों में महात्मा गाँधी ही सर्वोत्तम विकल्प थे यानि यदि मैंने या आप उस अवसर पर मौजूद होते और योग्यता साबित कर पाते तो भारत की तस्बीर शायद कुछ और होती , शायद आप मेरी बात नही समझे , कोई बात नही दूसरे तरीके से समझे / राजनीती शास्त्र का रहा कोई भी विद्यार्थी यह बखूबी समझता है की हम जिस शासन के और संबिधान के तहत जीते है वो इंग्लैंड , अमेरिका , फ्रांस आदि देशो के सम्बिधानो के लूट का धन है जिस पर तरक्की की बुनियाद रखे जाने की कोसिस पिछले पाँच से अधिक दशको से की जारही है और पता नही कोशिश कब तक चले गी या इसका अंजाम जो हम चाहते है वो ही मिलेगा / प्रकृति का नियम अनुभवी लोगो ने इसके विपरीत ही बताया है अस्तु उस कहावत का भी तो कही कुछ मायने होता होंगा की बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होए ?

अंग्रेज चले गए परन्तु अंग्रेजी छोड़ गए /आजाद होते भारत में उस वक्त जो नेता अंग्रेजो द्वारा समझे गए वो सभी इंग्लैंड से शिक्षा प्राप्त थे यानि हिन्दुस्तानी अंग्रेज थे जिनका तन हिदुस्तानी परन्तु दिमाग इंग्लिश था उन्होंने अमेरिका के राष्ट्रपति की उक्क्ति -प्रजातंत्र मूर्खो का मूर्खो के द्वारा मूर्खो के लिए अपनाई जाने वाली शासन व्यवस्था है , नही सुनी या पढ़ी नही होगी यह दूसरा मुर्खता पूर्ण ख्याल होगा /अंग्रेजो से पहले भारत शादियों से राजशाही शासन के अनुसार संचालित होता रहा था , पड़ोसी देश नेपाल और भूटान अबतक अनुगामी थे /अंग्रेजो की सोंच भारत को गहरी शाजिश के तहत ईशाईयत की ओ़र लेजाने की थी ,दूसरे शब्दों में भारतीय संस्कार ,भाषा ,रहन सहन , आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति , गुरुकुल विद्या अध्ययन का सम्मानपूर्ण तरीका , सामजिक अपनत्व भरे तानेबाने को कुचल डालने की थी , उनकी गहरी साजिश अब धीरे धीरे खूब रंग दिखने लगी है /हालत तेजी से बदल ने लगे है / यदि टूटी फूटी इंग्लिश में गन्दी गाली भी देदो तो आसपास खड़े आपको विद्वान ही समझे गे /संस्कृत भाषा में आपने प्रभु को स्मरण किया तो पोंगा पंडत समझे जाए गे / छोटी सी कोई बिमारी हो जाए और दिल्ली मुंबई जाना पड़ जाए तो आधुनिक चिकित्सा आपका खून का आखरी कतरा भी निचोड़ लेगी ,बचेगी केवल हिन्दुस्तानी आत्मा / माता -पिता ऊँची से ऊँची इंग्लिश कॉन्वेंट स्कूल में अपने बच्चो का दाखिला चाहते है / बच्चे इंग्लिश में हाउ डू यू डू कहते है तो अंग्रेजो की नक़ल करते बच्चे बड़े प्यारे लगते है , साथ ही कोई त्योंहार हो या घर आते जाते बड़े बुजुर्ग का पैर छू कर आर्शीवाद ले यह भी उम्मीद हम अपने अंग्रेज बन रहे बच्चो से करते है जो की संतान के प्रति दोगली निति का प्रतिक है /

अफगानिस्तान में जिस तालिबान को अमेरिका ने मिटटी में मिला दिया उस तालिबान की कट्टरता अपने सिद्धांतो को लेकर इतनी प्रखर हुई की समाज जिस भाषा से हमेशा नफ़रत करता आया है वो है हिंसा ,में बोलना शुरू कर दिया और यही से वो अपनी पहचान खोता चला गया और साथ ही विरोधियो की फौज खडी होती चली गयी /उसकी लडाई अपनी मुस्लिम रवायत को लेकर थी , वो कहते है अंग्रेज न बनो मुसलमान रहो परन्तु उतेजना बिच में घुस आई और मामला हिंसा की आंधी में उड़ गया /सवाल यह है की हम से भूल कन्हा हुई , क्या यह सच्च नही की जो शासन पद्धति हम ने अपनाई वो हमें अंग्रेज तो बना रही है मगर एक संवेदनशील हिन्दुस्तानी नही / मेरा मतलब विज्ञानं के विरूद्व जाना कतई नही , परन्तु यह भी सच्च है की जो बच्चे माँ बाप के खून पसीने से पलकर बढे वो बुढापे में मुंह पर थूक कर चल दे तो समाज दिशा ठीकनही yaह अन्धो को भी दीखता है /मन को यह कहकर फुसलाना की कलयुग है तो बदलाव की मांग को मीठी गोली देने जैसा है /कलयुग तो भगवान राम के युग में था की सीता का हरण हो गया और पूछने वाला कोई नही था आज किसी कन्या को कही छू भर भी दे तो पुलिस जान के पीछे लग जाए गी /कहना सिर्फ़ यह है की मन की आँखे खुलनी चाहिए , चीन भी तो एक देश है जो तरक्की की तुलना में हम से हजारो कदम आगे है परन्तु अंग्रेजी भाषा बिरले ही बोलते है / तब के नेताओ ने तब जो सोचा वो तब के हिसाब से अच्छा था , अब अयसा क्या हो की हमारी अगली पीढी अमेरिका से कंधे से कन्धा मिला कर चले मगर चाल में ठसक हिन्दुस्तानी हो /थैंक्स/

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