Monday, May 25, 2009

भूले बटोही की घर वापसी

सुबह का भुला शाम को घर वापस आ जाए तो भुला नही कहा जाता एक कहावत है जो भारत के अल्प सख्यको पर खूब फिट बैठती है /आजादी के बाद सभी वर्ग के लोग बिना ज्यादा सोचे समझे कांग्रेस के पीछे हो लिए थे क्यो की और कोई वैसी पार्टी नही थी जो लोगो में कांग्रेस जैसी पैठ रखती हो /अल्प संख्यक वर्ग का मन टूटा नरसिंह राव सरकार के शाशनकाल से जब राम मन्दिर तोडा गया /यह अल्प संख्यक वर्ग के वोटो का ही बिखराव था जो मुलायम सिंग ,लालू प्रसाद ,सभी कोम्निस्ट ,और अन्य दूसरे नेताओ का कद बढ़ता चला गया और यह कद इतना बढ़ा की कांग्रेस जैसी अखिल भारतीय पार्टी का साँस लेना कठिन हो गया और वो समय भी आ गया जब सरकार चलाने के लिए कांग्रेस इनके समर्थन की मुहताज हो गई परन्तु चुनाव २००९ ने सारे देशा में ऐसी बयार बहा दी जो खुद कांग्रेस भी उम्मीद नही करती थी की उत्तर प्रदेश जहा उसके पास खोने के लिए कुछ नही बचा था वहां २२ उम्मीदवार जित गए /सारा देश देखता रह गया /दूसरो की जाने दे खुद राहूल गाँधी ने नही सोचा था जभी तो चुनाव प्रचार के आखरी दिन उन्हों ने बिहार के मुख्य मंत्री नीतिश कुमार की जम कर प्रशंशा की ,लेफ्ट को राईट बताया याने अपनी सीमाओं को पहचानते हुए आगे की भूमिका जोड़नी शुरू करदी थी क्यो की आगे समर्थन की जरूरत दिख रही थी परन्तु उन्हें पत्ता नही था की अल्प संख्यक वर्ग पहले ही मन बना चूका था और वो चमत्कार दिखा दिया की आँखे दिखाने वाले समर्थन लेलो समर्थन लेलो की भीख मांग रहे थे क्यो उनके दिल में यह अचानक क्या हुआ की पीछे पीछे दौड़ पड़े असल बात यह थी उन्हें यह समझ हो गयी की अल्प संख्यक वोट कांग्रेस की झोली में वापस जा चूका है और वो वापस कांग्रेस से चिपके रहने पर ही वापस मिल सकता है और यह बात कांग्रेस भी जानती है और यही वजह है की कांग्रेस उन्हें घास नही डाल रही / आगे भारत की राजनीती नयी दिशा में जाना चाहती है ये स्पस्ट संकेत है कोई आश्चर्य नही की छेत्रिय पार्टियों का ज़माना बीत चूका हो नयी उड़ान के लिए अनंत आकाश खुला पड़ा है कांग्रेस की मर्जी है की वो चाहे जैसे उडे मगर केवल 5 वर्ष / क्यो की यह इस मायावि दुनिया का नियम है की जो आता है वो जाता भी है /थैंक्स/

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